पालघर:हरा सोना कही जाने वाली शिमला और हरी मिर्च की फसल पर ब्लैक थ्रिप्स की मार से थर्राए किसान,करोड़ों का नुकसान

by | Feb 22, 2023 | देश/विदेश, पालघर, महाराष्ट्र, मुंबई

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पालघर के किसान इन दिनों हरा सोना कहे जाने वाली हरी मिर्च और शिमला मिर्च की फसल पर ब्लैक थ्रिप्स कीट के अटैक से थर्राए हुए हैं। उनकी फसल चौपट हो गई है। जिससे उनका करोड़ों का नुकसान हुआ है। लेकिन अब तक इसका कोई समाधान निकलता नही दिख रहा है। किसानों का कहना है कि पांच-छह साल पहले बहुत कम कीड़े लगते थे, लेकिन तब उसके नियंत्रण की कोशिश नहीं की गई। इसका नियंत्रण न होने के पीछे नकली कीटनाशक बड़ी वजह बताई जा रही है। जिसकी वजह से किसानों ने पैसा भी लगाया और कीट पर नियंत्रण भी नहीं हुआ। पालघर,दहानू, वानगांव,विक्रमगढ़,तलासरी और बोर्डी में हजारों एकड़ में मिर्च की खेती थ्रिब्स नामक कीड़े के अटैक से प्रभावित है। किसान नेताओं का कहना है कि अब तक सरकारी की ओर से किसानो को हो रहे नुकसान के आकलन की कोई पहल नही हुई है। जबकि करीब दस हजार एकड़ के जिले के किसान हरी और शिमला मिर्च की खेती करते है। रोग के कारण बड़े पैमाने पर फसल बर्बाद हो रही है। किसानों को अब फसल से मुनाफा तो निकलने से रहा लागत मूल्य भी नसीब होता नजर नहीं आ रहा है।
मिर्च की खेती करने वाले वैभव पाटील का कहना है कि इस समस्या से बड़ी संख्या में किसान प्रभावित हैं, लेकिन सरकार के स्तर पर इसके नियंत्रण के लिए कुछ नहीं हुआ है।किसान लाखों रुपये लगाकर बैठे हैं, लेकिन उनकी फसल तबाह हो गई है। बढ़ते तापमान के साथ ही थ्रीप्स कीट का कहर और बढ़ रहा है। जिससे किसानों की मुसीबतें बढ़ गई है। किसानों को अब यह समझ में नहीं आ रहा कि बीज खाद किटनाशको का पैसा दुकानदारों को कहां से लौटाए।
एक अन्य किसान ने कहा कि जिले में किसानो को करोड़ों का नुकसान हुआ है। लेकिन सरकार को इसकी कोई चिंता नहीं है।

नकली कीटनाशकों की वजह से नहीं हो रहा नियंत्रण

शिमला मिर्च की खेती करने वाले स्वामीनाथ चौबे बताते है, कि किसानों को कुछ दुकानदार नकली और सस्ता कीटनाशक देकर गुमराह करते हैं। असली कीटनाशक बिल पर मिलता है। उसमें 18 फीसदी जीएसटी लगती है। इसकी वजह से वो महंगा पड़ता है। ऐसे में इसका प्रकोप बढ़ता गया।कीटनाशक से जब तक जीएसटी 18 फीसदी से कम नहीं होगी तब तक किसान उसे बिल पर नहीं खरीदेंगे। वे सस्ता के चक्कर में नकली के शिकार हो जाते हैं।इसलिए इस पर से जीएसटी कम करने की जरूरत है।
थ्रिप्स एक कीट है। जो पत्ती मोडक वायरस का प्रसार का वाहक है। थ्रिप्स की मादा 80 अंडे देती है जो दो से चार दिन में फूटता है, निम्फ और मादा दोनों पौधे की पत्तियों फूलों और कोमल शाखाओं को खुरचकर रस को चुसती है। यह पौधे की पत्तियों की निचली सतह पर और फूलों के बीच में पायी जाती है। वायरस का प्रसार करती है। जिससे मिर्च पौधे की पत्तियां सिकड़ने लगती है और फूलों में फल बनना रुक जाता है। इनका विस्तार बहुत तेजी से होता है। जो फसल उत्पादन को प्रभावित करता है। इस रोग से पौधे झाड़ीनुमा हो कर सूख रहे है।

रोजाना करोड़ो की मिर्च होती है सप्लाई

पालघर जिले से सैकड़ों ट्रक हरी और शिमला मिर्च रोजाना दिल्ली,जयपुर,बेलगांव नाशिक,मुंबई, सूरत,हैदराबाद सहित विभिन्न शहरों में भेजी जाती है। जिसकी कीमत करोड़ो में होती है।

दूसरे देश से आया थ्रिप्स

यह कीड़ा 2015 के आसपास इंडोनेशिया से आयात होने वाले पतीता के साथ आया था। तब जिन एजेंसियों की जिम्मेदारी थी कि वो कीटों पर नियंत्रण करते उन्होंने काम ठीक से नहीं किया।इसे लेकर कोई रिसर्च नहीं हुई, जिसकी खामियाजा आज किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

कितना हुआ नुकसान?

किसानों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में करोड़ों रुपये की हरी और शिमला मिर्च की फसल का नुकसान हो चुका है। फसल खराब होने की वजह से एक्सपोर्ट भी प्रभावित हुआ है। प्रति एकड़ हरी मिर्च की खेती पर औसतन लगभग डेढ़ से दो लाख रुपए और शिमला मिर्च खेती पर प्रति एकड़ करीब ४ लाख रुपए किसानो का खर्च होता है। लेकिन सरकारी नीतियों की वजह से एक कीट ने उनकी मेहनत और लागत, सब पर पानी फेर दिया।

कृषि विशेषज्ञों की टीम किसानों का लगातार मार्गदर्शन कर रही है। फिलहाल फसल को होने वाले नुकसान के बदले किसानों को मुआवजा देने की अभी कोई योजना नहीं है।

दिलीप नेरकर जिला कृषि अधिकारी पालघर

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