कुपोषण का घर है पालघर,मां की गोद में ही बुझ गए कई घरों के चिराग,साल भर में 294 बच्चों और 20 माताओं की मौत

by | Dec 8, 2022 | पालघर, महाराष्ट्र, वसई विरार

पालघर जिले में एक बार फिर शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए है है। अक्टूबर तक 2021-22 में 294 बच्चों की मौत और 20 मातृ मृत्यु और 2022-23 में 151 बच्चों की मौत और 7 मातृ मृत्यु की सूचना मिली है। इनमें से अधिकांश बच्चों की मौत जव्हार, दहानु और विक्रमगढ़ तालुकों में हुई है।

पालघर जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर, बेरोजगारी और कुपोषण को दूर करने के लिए ठाणे जिले को विभाजित करके पालघर जिला बनाया गया था। लेकिन इस मौके पर एक बार फिर सामने आया है कि ये सवाल आज भी बना हुआ हैं. सरकार को इस पर ठोस कदम उठाना होगा ।

एक बार फिर से यह साबित हो गया है कि जिले में बालमृत्यु व मातृमृत्यु को लेकर हालात ज्यो के त्यों है । इनमें से अधिकतर बच्चों की मौत जिले में अपर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं और समय पर इलाज के अभाव में सड़कों की कमी के कारण हुई है. पालघर में आज भी शिशु मृत्यु दर जैसी गंभीर समस्या से निजात पाने में प्रशासन और सरकार दोनों नाकाम साबित हो रही हैं.

जानिए क्या कहते है आंकड़े

● 2014-15 शिशु मृत्यु दर (626)
● 2015-16 शिशु मृत्यु दर (565)
● 2016-17 शिशु मृत्यु दर (557) मातृ मृत्यु दर (18)
● 2017-18 शिशु मृत्यु दर (469) मातृ मृत्यु दर (19)
● 2018-19 शिशु मृत्यु दर (348) मातृ मृत्यु दर (13)
● 2019-20 शिशु मृत्यु दर (303) मातृ मृत्यु दर (10)
● 2020-21 शिशु मृत्यु दर (296) मातृ मृत्यु दर (12)
● 2021-22 शिशु मृत्यु दर (296) मातृ मृत्यु दर (20)
● 2022-23 (अक्टूबर तक) शिशु मृत्यु दर (151) मातृ मृत्यु दर (07)

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