हलाल प्रोडक्ट्स पर बैन की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर,विभिन्न प्रॉडक्ट के माध्यम से 85% आबादी को जबरदस्ती मीट खिलाने की कोशिश

by | Apr 23, 2022 | देश/विदेश

हलाल प्रमाणित उत्पादों पर राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध लगाने और हलाल प्रमाण पत्र वापस लेने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है.
एडवोकेट विभोर आनंद ने वकील रवि कुमार तोमर के माध्यम से दायर की गई याचिका में अदालत से हलाल सर्टिफिकेशन (Halal Certification) सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और जमीयत उलमा-ए-हिंद हलाल ट्रस्ट सहित संबंधित अधिकारियों द्वारा हलाल प्रमाणित किए गए सभी उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश जारी करने का आग्रह किया है.

याचिका में विस्तृत रूप से कहा कि हलाल सर्टिफिकेशन पहली बार साल 1974 में सामने आया था, जिसका इस्तेमाल मांस के लिए होता था. 1974 से पहले हलाल सर्टिफिकेशन जैसा कुछ नहीं था. उन्होंने यह भी कहा कि 1974 से 1993 तक हलाल सर्टिफिकेशन केवल मांस उत्पादों तक ही सीमित था, लेकिन बाद में इसने कई उत्पादों को कवर किया.
इस याचिका में याचिकाकर्ता ने यहां जिन उत्पादों की बात की है, उसमें फार्मास्यूटिकल्स, सौंदर्य प्रसाधन, स्वास्थ्य उत्पाद और चिकित्सा उपकरण शामिल हैं.
याचिकाकर्ता के अनुसार, इस याचिका को देश की 85 फीसदी जनसंख्या की तरफ से दायर किया गया है. इसमें खास तौर से संविधान के अनुच्छेद 14, 21 के उल्लंघन का भी जिक्र है.
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक विभोर आनंद का कहना है कि महज 15 फीसद लोगों की भलाई के लिए इस तरह की व्यवस्था को अमल में कैसे रखा जा सकता है. 85 फीसदी आबादी को जबरदस्ती हलाल मीट खिलाने की कोशिश की जा रही है. किसी के धार्मिक विश्वास को दूसरों पर थोपना धर्मनिरपेक्षता का उल्लंघन है जो भारत के संविधान की मूल संरचना है.

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