सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर डिलीवरी के नाम पर की जाती है धन उगाही

by | Mar 2, 2022 | उत्तर प्रदेश

शिवशंकर शुक्ल

प्रयागराज / मेजा तहसील के मांडा में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कोई भी सरकारी महिला डॉक्टर न होने से उपचार कराने आनेवाली महिलाओं को काफी कठहिनाइयो का सामना करना पड़ता है। भुक्तभोगी महिलाओ का कहना है कि यहां पर जो भी महिलाएं डिलीवरी करवाने आती हैं इस हॉस्पिटल में कार्यरत आशा, डॉ विनोद कुमारी, डॉ किरण, डॉक्टर ज्योति आदि द्वारा डिलीवरी के नाम पर बक्शीश कह कर 1000 से 2000 रुपए तक लेलेती हैं । था आरोप चकड़ीहा गांव की मंजू ,संगीता के अलावा कोसफरा गांव की पूनम व मंडार की गीता देवी आदि ने लगाया है। उक्त महिलाओ का यह भी आरोप है की डिलीवरी के नाम पर मनामना धन उगाही की जाती है ।दूसरी तरफ जो मरीजों की पर्ची बनाई जाती है वह एक रुपए की बजाए दो रुपए लिए जाते हैं। इस पर पर्ची काटने वाले समीर अहमद सिद्दीकी से बात किया गया तो उन्होंने कहा की मैं दो रुपया ही लूंगा, जिसको पर्ची कटवाना हो कटवाए नहीं तो मत कटवाए । इस हॉस्पिटल में बच्चों के डॉक्टर भी नहीं मौजूद हैं जिससे लोगों को शहर भागना पड़ता है । विश्वस्त सूत्रों से यह भी पता चला है कि यहां पर कुत्ते काटने की जो सुई लगाई जाती है उस सुई के नाम पर भी 20 रुपए से 50 रुपए तक की वसूली की जाती है । यहां के फार्मासिस्ट अजय कुमार से जब दर्द और बुखार की दवा मांगी जाती है तो उनका कहना यह होता है कि दवा नहीं है भैया बाहर से ले लीजिए । यहां पर सरकारी हॉस्पिटल में पर्ची पर दवाइयां तो लिख दी जाती हैं लेकिन सारी दवाइयां मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ती है
अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अस्पताल द्वारा खुलेबाजार में झोला छाप डाक्टरो को ऊंचे दामों पर बेच दी जाती है।इस कार्य में वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल है ,जिस से कोई कार्यवाही नहीं होती है। आप कितनी भी शिकायते करले।
आखिर सरकार लाखों रुपए खर्च करके सरकारी हॉस्पिटल में हर महीने दवाइयों की सप्लाई करती है। गरीब आदमी दवा के नाम पर सरकारी हॉस्पिटल तो आते हैं लेकिन उनका सही इलाज नहीं हो पाता, मजबूरन उन्हें बाहर से इलाज कराना पड़ता है । सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मांडा के अधीक्षक डॉ सुरेश सोनकर से बात की गई तो उनका कहना है कि जब तक मुझे लिखित शिकायत नहीं दी जाती तब तक मैं किसी के ऊपर कोई कार्यवाही नहीं करूंगा । सूत्रों का यह भी कहना है कि यहां ऐसे तमाम बिना लाइसेंस के प्राइवेट हॉस्पिटल भी चलाए जा रहे हैं जो कि अधीक्षक के संरक्षण में चल रहे हैं । अधीक्षक द्वारा कभी भी क्षेत्रीय हॉस्पिटलों की जांच नहीं की जाती बतादे की बिना लाइसेंस के अनेको दवा खाना व हॉस्पिटल चल रहे हैं। जिससे आए दिन मरीजों की मौत होती रहती है। सरकारी हॉस्पिटल की सही देखभाल भी नही की जा रही है । जिससे हॉस्पिटल में गंदगी और आवारा पशुओं का घूमना फिरना लगा रहता है । यह हॉस्पिटल एक वार्ड बॉय राजकुमार के सहारे ही चलता नजर आ रहा है ।

यह न्यूज जरूर पढे