स्ट्रॉबेरी की ऑर्गेनिक फार्मिंग से पालघर के आदिवासी किसानों के जीवन में खुला समृद्धि का नया रास्ता

by | Feb 21, 2022 | पालघर, महाराष्ट्र

पालघर : आज के समय में अधिकांश लोग खेती किसानी को छोड़ कर कमाई का अलग जरिया ढूंढ रहें हैं। वहीं कई किसान खेती में नये-नये प्रयोग कर के लाखों का मुनाफा कमा रहें हैं। उदाहरण के लिए पालघर के किसानों को ही ले लीजिए वो इन दिनों स्ट्रॉबेरी की बड़े पैमाने पर खेती कर हैं। उन्हें अब बागवानी फसलों की खेती में ज्यादा फायदा दिख रहा है। किसानों का कहना है कि पारंपरिक खेती से उन्हें इतना मुनाफा नहीं मिल रहा। उससे तो वो मुश्किल से अपनी लागत निकाल पाते थे। वाड़ा के गारगांव में हितेश पाटिल सहित और लक्ष्मण राऊत, शांताराम खोडके, भाऊ राऊत, किशोर सोनवणे,रोहित सहित 6 किसानों ने स्ट्रॉबेरी के 2000 हजार पौधों को लगाए है। 

कैसे हुई स्ट्रॉबेरी खेती की शुरुआत

पालघर जिले के वाडा तालुका के गारगांव के रहने वाले किसानों ने बताया कि पहले हम धान की खेती करते थे लेकिन बदलते मौसम और लागत न निकाल पाने की वजह से हमने खेती में बदलाव करने का विचार किया। पहले हमें इस खेती के लिए ट्रेनिंग मिली। फिर किसानों ने कृषि विभाग के मागर्दशन से स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। इससे हमें अच्छा मुनाफा हो रहा है। इसमें कम लागत के साथ ज्यादा मुनाफा हो रहा है इसलिए हम आगे भी बागवानी की खेती ही करेंगे।

किसानों ने बताया कि स्ट्रॉबेरी खेती से 42 दिनों में फल मिलने लगते है।  हम 300 से 500 रुपये प्रति किलो के भाव से बाज़ारों में बेचते हैं। पालघर से स्ट्रॉबेरी मुंबई, नासिक, ठाणे इन जगहों पर हम भेजते हैं। हितेश पाटिल ने बताया कि आर्गनिक खेती जहां लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहतर है,तो वही जमीन के लिए भी लाभकारी है।स्ट्रॉबेरी की खेती से गांव में ही लोगों को रोजगार भी मिलेगा।किसानों ने सरकार से मांग की है उन्हें इस खेती के लिए सब्सिडी प्रदान करें।

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कृषि से बढेंगे रोजगार के अवसर
पालघर जिले के दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों के किसान पारंपरिक तौर पर धान की खेती करते हैं। इसके अलावा कोई अन्य फसल नहीं उगाई जाती। रोजगार के अभाव में यहां बेरोजगारी बढ़ी है। बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार जीवन निर्वाह के लिए शहर की ओर पलायन कर रहे हैं। इसलिए, कुछ सालों से ये तालुका हमेशा कुपोषण और बाल मृत्यु दर के कारण चर्चा में रहा हैं।लेकिन अब कुछ आदिवासी किसान खुद आधुनिक खेती की ओर रुख कर चुके हैं। इससे उनका जीवन बदला है।यह दूसरे किसानों के लिए मिसाल है। उन्होंने स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है।
पुणे से परीक्षण लेने के बाद  कृषि विभाग और सेवा सहयोग संस्था के मार्गदर्शन से हमने पहली बार आर्गनिक तरीके से स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। अब हमें अच्छा मुनाफा हो रहा है। किसानों की अब आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है।

हितेश पाटिल- किसान गारगांव वाड़ा

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