“एक संबंध ऐसा भी…” प्यार भरी मार्मिक कहानी

by | Feb 12, 2022 | देश/विदेश

वैसे जिंदगी को अकेलेपन में जीना बहुत कठिन होता है । असल जिंदगी जीने के लिए आदमी-औरत एक सांसारिक जीवन की गाड़ी के दो पहिये होते है ।
एक व्यक्ति ने एक बहुत ही खूबसूरत लड़की से शादी की । शादी के बाद दोनो की जिंदगी बहुत प्यार से गुजर रही थी । एक दूसरे के साथ से जीवन के हर पल खुशुनुमा बनकर कट रहे थे ।
आदमी अपनी पत्नी को बहुत चाहता भी था व खूब प्यार भी करता था । उसकी खूबसूरती की हमेशा बात बात पर तारीफ किया करता था । लेकिन भगवान ने मनुष्य जीवन को जितना प्यारा बनाया उतनी ही कुछ न कुछ कसर भी रख दी ताकि मनुष्य अहम को छोड़कर कुछ खुद अपने शरीर की परवाह भी करे ।

दोनो मिया-बीवी की लव लाइफ में एक ऐसा मोड़ आया कि कुछ ही महीनों बाद उसकी खूबसूरत पत्नी चर्म रोग की शिकार हो गई और धीरे धीरे उसकी खूबसूरती जाने लगी ।

पत्नी खुद को इस तरह देखकर उसके मन में डर समाने लगा कि यदि वह बदसूरत हो गई, तो उसका पति उससे नफ़रत करने लगेगा और वह उसकी नफ़रत बर्दाशत नहीं कर पाएगी।क्योकि वो दोनो एकदूसरे को बेइंतहा चाहते थे ।

इस बीच एकदिन पति को किसी काम से शहर से बाहर जाना पड़ा।काम ख़त्म कर जब वह घर वापस लौट रहा था, उसका एक्सिटेंट हो गया। इस दुर्घटना में उसने अपनी दोनो आँखें खो दी।

लेकिन इतना सबकुछ हो जाने के बावजूद भी उन दोनो मिया-बीवी की जिंदगी सामान्य तरीके से आगे बढ़ती रही।

समय गुजरता रहा और अपने चर्मरोग के कारण लड़की ने अपनी खूबसूरती पूरी तरह गंवा दी। खूबसूरत चेहरा दागदार हो चुका था ,सर पर बाल भी कम हो गए मतलब पूरी तरह से अपनी सुंदरता खो चुकी थी । वह बदसूरत हो गई थी, लेकिन अंधे पति को इस बारे में कुछ भी पता नहीं था।

इसलिए इसका उनके खुशहाल विवाहित जीवन पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा।वह उसे उसी तरह प्यार करता रहा।

एकदिन उस लड़की की अचानक मौत हो गई। पति अब अकेला हो गया था। वह बहुत दु:खी था। वह उस शहर को छोड़कर जाना चाहता था।

उसने अंतिम संस्कार की सारी क्रियाविधि पूर्ण की और शहर छोड़कर जाने लगा। तभी एक आदमी ने पीछे से उसे पुकारा और पास आकर कहा,“अब तुम बिना सहारे के अकेले कैसे चल पाओगे?

इतने साल तो तुम्हारी पत्नि तुम्हारी मदद किया करती थी।हर बात पर तुम दोनो एकदूसरे के बगैर अधूरे थे ,अब कैसे कटेगा जीवन ?

पति ने जवाब दिया, दोस्त! मैं अंधा नहीं हूँ! मैं बस अंधा होने का नाटक कर रहा था। जो मैंने खुद फैसला लिया था यह बात सिर्फ मैं ही जानता था ।

क्योंकि यदि मेरी पत्नि को पता चल जाता कि मैं उसकी बदसूरती देख सकता हूँ, तो यह उसे उसके रोग से ज्यादा दर्द देता। इसलिए मैंने इतने साल अंधे होने का दिखावा किया। वह बहुत अच्छी पत्नि थी,दोस्त थी,साथी थी मतलब मेरे लिए सबकुछ थी । मैं बस उसे खुश रखना चाहता था।पर भगवान को शायद यह मंजूर नही था ।

सीख:- खुश रहने के लिए हमें भी एक दूसरे की कमियो के प्रति आखे बंद कर लेनी चाहिए और उन कमियो को नजरन्दाज कर देना चाहिए.

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