शिमला मिर्च की खेती से बदल रही है पालघर के किसानों की तकदीर

by | Jan 15, 2022 | पालघर, महाराष्ट्र

पालघर के विभिन्न क्षेत्रों में उगाई जा रही शिमला मिर्च की खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो रही हैं। इस खेती से किसान कम समय में मालामाल हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि कम जमीन में भी इस खेती से एक साल में एक एकड़ जमीन में लाखों रुपए कमाए जा रहे हैं।  शिमला मिर्च की खेती से पालघर जिले के सैकड़ो किसान इससे अच्छी आमदनी कर रहे हैं। साथ ही इससे आसपास के हजारों लोगों को रोजाना रोजगार भी मिल रहा है। पालघर, दहानू और आस-पास के इलाके में हजारों एकड़ में शिमला मिर्च की खेती करते हैं। मुंबई से जिला सटा होने से यहां के किसानों को मार्केट भी मिल जाता है।

अक्टूबर में शुरू होती है खेती

शिमला मिर्च की खेती की तैयारी में यहां के किसान अक्टूबर से जुट जाते है। दिसंबर में शिमला मिर्च का उत्पादन शुरू हो जाता है। जो अप्रैल तक चलता है। शिमला मिर्च के उत्पादन के प्रति एकड़ किसानों को लाखों का खर्च उठाना पड़ता  है।और अगर 40 रुपये किलो तक का भाव उन्हें मिल जाये तो प्रति एकड़ करीब 3 लाख रुपये का मुनाफा उन्हें मिल जाता है।
16 साल से 10 एकड़ में शिमला मिर्च की खेती करने वाले किसान स्वामीनाथ चौबे ने बताया कि शिमला मिर्च की खेती काफी कारगर साबित हो रही है। दिसंबर के पहले हप्ते में शिमला मिर्च के 70 रुपये किलो तक के भाव मिले। इस समय करीब40 रुपए प्रति किलो शिमला मिर्च बेच रहे हैं। यह खेती काफी लाभदायक साबित हो रही है। पिछले तीन वर्षों से कोरोना और प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान खा रहे किसानों को इस बार शिमला मिर्च का अच्छा भाव मिलने से उन्हें राहत मिली है।
शिमला के किसान प्रताप ठाकुर ने बताया कि शिमला मिर्च की खेती काफी मंहगी हो गई है। ऐसे में इस बार शिमला मिर्च के ठीक-ठाक भाव मिलने से थोड़ी किसानों को काफी राहत मिली है।

40 ट्रक शिमला मिर्च की रोजाना होती है सप्लाई

पालघर, दहानू और वानगांव इलाकों से करीब 40 ट्रक (400 टन) शिमला मिर्च की सप्लाई किसान रोजाना कर रहे है। जिसके बदले में यहां के किसानों को करोड़ो रुपये मिल रहे है।

6 से ज्यादा राज्यों में भेजी जाती है शिमला मिर्च

दिल्ली,कर्नाटक,हैदराबाद,बैंगलुरू, संभाजीनगर,मुंबई,नासिक और कोलकाता सहित कई शहरों में रोजाना पालघर जिले से शिमला मिर्च भेजी जाती है। 

शिमला मिर्च की खेती की 25 साल पहले हुई थी शुरुआत

पालघर के वानगांव इलाके में इन दिनों शिमला मिर्च की फसल लहलहा रही है। लेकिन कभी यहां भी पारम्परिक खेती ही होती थी। लेकिन 25 साल पहले दिवंगत दिनेश कोरे ने खेती से कुछ अलग करने की ठानी और वह अपने एक अन्य साथी  विवेक शाह के साथ इजरायल पहुँच गये और वहां शिमला मिर्च की खेती की तकनीक सीखी और इसे पालघर लाये। कोरे की लाई तकनीकी से यहां के सैकड़ो किसानों के जीवन मे बदलाव आया।
बाजारों में शिमला मिर्च की भारी मांग है। जिससे शिमला लेने के लिए व्यापारियों में रेट की प्रतिस्पर्धा भी हो रही है। खेतों से ही किसान का माल व्यापारी बाजार भेज रहे है। जिससे किसानों को ट्रांसपोर्ट के खर्चो से भी राहत मिली है। जिसका फायदा किसानों को मिल रहा है।
सत्य नारायण यादव-सब्जी व्यापारी

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