पालघर में 22,000 किलोमीटर का सफर तय कर पहुंचा अमूर बाज

by | Jan 1, 2022 | पालघर, महाराष्ट्र, वसई विरार

■ 1 माह में आधी दुनिया का चक्कर लगा सकता है यह पक्षी
■ 5600 किमी तक बिना रुके उड़ता है यह बाज

पालघर के खूबसूरत समुद्री तट पर विदेशी पक्षी हजारों किलोमीटर का सफर तय करके यहां अपना प्रजनन करने पहुंचते हैं। जिससे साल के ज्यादार महीनों में यहां के समुद्री तट पर विभिन्न प्रकार के दुर्लभ पक्षियों का जमावड़ा रहता है। अमूर बाज(अमूर फाल्कन) ऐसा ही एक पक्षी है जो कि यहां करीब 22,000 किलोमीटर का रास्ता तय करके पहुँचा है।

पालघर के वसई , विरार , दातीवरे, नांदगाव, दांडी, उनभात, चिंचणी, वरोर, वाढवण ,बोर्डी झाई तक समुद्री तट शांत वातावरण होने के कारण प्रवासी पक्षियों को भी खूब भाता है। यहां के समुंदर का तटीय क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नही है। साइबेरिया व उत्तरी चीन में पाया जाने वाला पक्षी अमूर फाल्कन यहां पहले भी नजर आया है। ये पक्षी छोटी मछली और चिम्बोरी खाकर अपना पेट भरते हैं। पक्षी प्रेमी, और पर्यावरण विज्ञान के छात्र वैभव हल्दीपुर ने इस खूबसूरत पक्षी की तस्वीर कैमरे में कैद की है। अमूर फाल्कन इन दिनों पालघर के तटीय क्षेत्रों में प्रवास कर रहे है।

चुस्ती के लिए जाना जाता है

अमूर फाल्कन साल में दो से तीन बार अपनी स्थिति बदलता है। खास बात यह है कि इस पक्षी का आधा दिमाग हमेशा अलर्ट रहता है। तो फाल्कन 48 घंटे से अधिक सीधे आकाश में उड़ सकता है। पक्षी प्रेमी प्रवीण बाबरे ने कहा कि ऐसा लगता है,कि अमूर फाल्कन रूस और अफ्रीका से नागालैंड पहुंचे और फिर पालघर आए होंगे। अमूर फाल्कन को देखने के लिए पक्षी प्रेमियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।

इस रास्ते से आते हैं भारत

अमूर बाज(अमूर फाल्कन) मूलत: रूस के साइबेरिया क्षेत्र अमूर का बाशिंदा है। नवंबर में बर्फबारी से ठीक पहले अनुकूल मौसम और भोजन की तलाश में यह अमूर से पलायन कर चीन से भारत के नार्थ ईस्ट इलाकों से होते हुए दक्षिण अफ्रीका जाते हैं।

तटीय क्षेत्रों में प्रवासी पक्षी आ चुके हैं। इन मेहमानों की सुरक्षा के लिए वन विभाग पूरी तरह तैयार है। पक्षियों की सुरक्षा के लिए टीमें बनाकर निगरानी की जा रही है।

नीलेश मोरे-वनपरिक्षेत्र अधिकारी-बोईसर

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