Sorry मित्रों ! हम आपको अंग्रेजी नववर्ष की शुभकामना नही दे रहे है बल्कि आपको अपने नववर्ष के पावन दिन का महत्व बता रहे है जो कितना अटूट व खास है

by | Dec 31, 2021 | देश/विदेश

मुंबई : माफ करना हम आपको अंग्रेजी नववर्ष की शुभकामना नही देंगे क्योकि हम देश की भावनाओ की कदर करते है । हम राष्ट्र को समर्पित पत्रकारिता करते है । देशभर में बदलाव देखने को मिल रहा है बड़ी तादाद में लोग अंग्रेजी नववर्ष की शुभकामना देने में रुचि नही दिखा रहे है । पर जो मना रहे है उनको उनकी खुशी मुबारक व जो नही मना रहे है उनका आभार । विश्वभर में नया साल मनाने का तरीका भी अलग-अलग है। सभी धर्मों में नया साल एक उत्सव की तरह अलग-अलग अंदाज में अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कोई नाच-गाकर तो कोई पूजा-अर्चना के साथ नए साल का स्वागत करता है। भारत मे 31st को दुनिया के कई देशों के देखा देखी नए वर्ष के स्वागत के बहाने सिर्फ शोर शराबे के रूप में मनाते है । जिसमे अक्सर देखा गया है शराब पार्टियों का आनंद उठाते है व दिवाली पर पटाखों से प्रदूषण का ज्ञान देने वाले नए साल के स्वागत में आतिशबाजी कर लुफ्त उठाते है ।

1 जनवरी से ईसाई वर्ष शुरू होकर 31 दिसंबर तक 12 महीनों में बंटा हुआ है।
ईसाई नववर्ष की शुरुआत 15 अक्टूबर 1582 से हुई। इसके कैलेंडर का नाम ग्रिगोरियन कैलेंडर है। जूलियस सीजर ने ईसा पूर्व 45वें वर्ष में जूलियन कैलेंडर बनाया। तब से 1 जनवरी को नववर्ष मनाते हैं।

भारत वर्ष के लिए महत्वपूर्ण है हिंदू नववर्ष जो एक त्यौहार के रूप में पूजा-पाठ करके सात्विक रूप से मनाया जाता है । हिंदू नववर्ष का प्रारंभ चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से माना जाता है। इसे हिंदू नव संवत्सर या नया संवत भी कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान ब्रह्मा ने इसी दिन से सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी। इसी दिन से विक्रम संवत के नए साल की शुरुआत होती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह तिथि अप्रैल में आती है। इसे गुड़ी पड़वा, उगादी आदि नामों से भारत के कई क्षेत्रों में मनाया जाता है।

जानिए हिंदू नववर्ष का महत्व

गुड़ी पड़वा (मराठी-पाडवा) के दिन हिन्दू नव संवत्सरारम्भ माना जाता है। चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को गुड़ी पड़वा या वर्ष प्रतिपदा या उगादि (युगादि) कहा जाता है। इस दिन हिन्दु नववर्ष का आरम्भ होता है। ‘गुड़ी’ का अर्थ ‘विजय पताका’ होता है। कहते हैं शालिवाहन ने मिट्टी के सैनिकों की सेना से प्रभावी शत्रुओं (शक) का पराभव किया। इस विजय के प्रतीक रूप में शालिवाहन शक का प्रारंभ इसी दिन से होता है। ‘युग‘ और ‘आदि‘ शब्दों की संधि से बना है ‘युगादि‘। आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में ‘उगादि‘ और महाराष्ट्र में यह पर्व ‘ग़ुड़ी पड़वा’ के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन चैत्र नवरात्रि का प्रारम्भ होता है।

हिंदुओं का नववर्ष यानि नवसंवत्सर 2079 भी शनिवार के ही दिन 02 अप्रैल 2022 से प्रारंभ होगा। हिन्दू मास में दो पक्ष होते है, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष। ये दोनों पक्ष चंद्रमा की गतिविधि पर आधारित होते है। जब चन्द्रमा घटते क्रम में होता है तो उसे कृष्ण पक्ष कहते है। जब चंद्रमा बढ़ते क्रम में होता है तो वह शुक्ल पक्ष कहा जाता है। हिंदू नववर्ष का आरंभ चैत्र मास से होता है। वहीं, वर्ष का अंत फाल्गुन माह में होता है।

हिंदू महीनों का नाम नक्षत्रों के नाम के अनुसार रखे गए हैं। किसी भी महीने की पूर्णिमा तिथि को चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, उसी के आधार पर किसी भी महीने का नाम रखा गया है। है। मास की पहली तिथि प्रतिपदा होती है। फिर द्वितीया, तृतीया आदि चतुर्दशी तक चैदह तिथियां आती हैं। इसके बाद पंद्रहवीं तिथि पूर्णिमा या अमावस्या होती है।

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