जगद्गुरू शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती ने किया भगवान दत्तात्रेय का दर्शन पूजन

by | Dec 19, 2021 | महाराष्ट्र, मुंबई

धर्मेन्द्र उपाध्याय

मुंबई।भगवान दत्तात्रेय के जयन्ती के पावन अवसर पर काशी सुमेरु पीठाधीश्वर अनन्त विभूषित पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती महाराज ने भगवान दत्तात्रेय का दर्शन-पूजन किया | इस अवसर पर सनातन धर्मावलम्बियों को दिए अपने सन्देश में पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य भगवान ने कहा कि–
“आदौ ब्रह्मा मध्ये विष्णुरन्ते देवः सदाशिवः ।
मूर्तीत्रयस्वरूपाय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ।।”
त्रिदेव स्वरूप, अत्रि अनुसुईया पुत्र, संन्यास परम्परा के प्रेरणास्रोत श्री गुरू दत्तात्रेय भगवान भगवान में ईश्वर और गुरु दोनों रूप समाहित हैं, इसीलिए उन्हें ‘परब्रह्ममूर्ति सद्गुरु’और ‘श्रीगुरुदेवदत्त’भी कहा जाता है। उन्हें गुरु वंश का प्रथम गुरु, साधक, योगी और वैज्ञानिक माना जाता है। भगवान दत्तात्रेय ने पारद से व्योमयान उड्डयन की शक्ति का पता लगाया था, और चिकित्सा शास्त्र में क्रांतिकारी अन्वेषण किया था।
त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश की प्रचलित विचारधारा के विलय के लिए ही भगवान दत्तात्रेय ने जन्म लिया था, इसीलिए उन्हें त्रिदेव का स्वरूप भी कहा जाता है। शैवपंथी उन्हें शिव का अवतार और वैष्णवपंथी विष्णु का अंशावतार मानते हैं। दत्तात्रेय को नाथ संप्रदाय की नवनाथ परंपरा का भी अग्रज माना है। रसेश्वर संप्रदाय के प्रवर्तक भी भगवान दत्तात्रेय हैं ।
भगवान दत्तात्रेय ने जीवन में कई लोगों से शिक्षा ली। दत्तात्रेय ने अन्य पशुओं के जीवन और उनके कार्यकलापों से भी शिक्षा ग्रहण की। भगवान दत्तात्रेयजी कहते हैं कि जिससे जितना-जितना गुण मिला है, उनको उन गुणों का प्रदाता मानकर उन्हें अपना गुरु माना है | इस प्रकार उनके 24 गुरु हैं। पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, चंद्रमा, सूर्य, कपोत, अजगर, सिंधु, पतंग, भ्रमर, मधुमक्खी, गज, मृग, मीन, पिंगला, कुररपक्षी, बालक, कुमारी, सर्प, शरकृत, मकड़ी और भृंगी।
भगवान दत्तात्रेय जी ने परशुरामजी को श्रीविद्या-मंत्र प्रदान की थी, और उन्होंने ही शिवपुत्र कार्तिकेय को अनेक विद्याएँ दी थी। भक्त प्रह्लाद को अनासक्ति-योग का उपदेश देकर उन्हें श्रेष्ठ राजा बनाने का श्रेय दत्तात्रेय को ही जाता है।
गुरु गोरखनाथ को आसन, प्राणायाम, मुद्रा और समाधि-चतुरंग योग का मार्ग भगवान दत्तात्रेय की भक्ति से प्राप्त हुआ था।
पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य भगवान ने कहा कि भगवान दत्तात्रेय नित्य प्रात: काशी में गंगाजी में स्नान करते थे। इसी कारण काशी के मणिकर्णिका घाट की दत्त पादुका दत्त भक्तों के लिए पूजनीय स्थान है। इसके अलावा मुख्य पादुका स्थान कर्नाटक के बेलगाम में स्थित है। देश भर में भगवान दत्तात्रेय को गुरु के रूप में मानकर इनकी पादुका को नमन किया जाता है। भगवान दत्तात्रेय जी के दर्शन-पूजन से त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और भगवान शिव) का दर्शन-पूजन एक साथ हो जाता है |
–स्वामी बृजभूषणानन्द महाराज

यह न्यूज जरूर पढे