अमृत महोत्सव की काव्य-गोष्ठी में बही राष्ट्रभक्ति की बयार

by | Dec 16, 2021 | उत्तर प्रदेश, रायबरेली


डॉ.कामता नाथ सिंह
रायबरेली/प्रतापगढ़। अमृत महोत्सव आयोजन-समिति प्रतापगढ़ के तत्वावधान में शहर के लीला पैलेस सेनानी-ट्रस्टभवन सभागार में आयोजित काव्यगोष्ठी में कवियों ने राष्ट्रभक्ति के गीतों से जनमानस को सराबोर कर दिया।
गोष्ठी की अध्यक्षता ‘कविकुल’ अध्यक्ष परशुराम उपाध्याय ‘सुमन’ तथा संचालन सुमधुर गीतकार सत्येंद्र नाथ मिश्र ‘मृदुल’ ने किया। सर्वप्रथम भारतमाता एवं माँ सरस्वती जी के चित्र पर माल्यार्पण करके, पूजन एवं दीप प्रज्वलन के बाद कार्यक्रम का श्रीगणेश किया गया। चर्चित रचनाकार सुरेश नारायण दुबे ‘ब्योम’ की माँ वाणी-वन्दना के साथ शुरू हुई काव्य गोष्ठी में संयोजक सुनील ‘प्रभाकर’ ने सभी आगन्तुकों का स्वागत करते हुए अमृत महोत्सव के कार्यक्रमों की संक्षिप्त रूपरेखा प्रस्तुत की। इस अवसर पर डॉ.संगम लाल त्रिपाठी ‘भँवर’ ने पढ़ा-
“शान और सम्मान का है ज्ञान वंदे मातरम्,
यह हमारे देश की पहचान वंदे मातरम्”।
सुरेश नारायण दुबे ‘ब्योम’ ने पढ़ा_ “चित्त बुद्धि मन कुल विचार में, अर्जित पोषित संस्कार में, रोम रोम में हो आनंदम्, धरा व्योम तक हो आनंदम्” संचालक सत्येंद्र नाथ मिश्र मृदुल ने _
“तुम्हारी चौकसी से देश का दुश्मन सिहर जाए”
पंक्तियों की रचना पढ़कर राष्ट्र को सजग किया ।
वहीं, सुनील प्रभाकर ने “जीवन ऐसा हो जैसे हो गंगा का पानी।”
अध्यक्षता कर रहे परशुराम उपाध्याय ‘सुमन’ ने राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता की अभिव्यक्ति के साथ _ “आएगा जो सामने जवाब मुँह तोड़ देंगे, देश का नवीन इतिहास गढ़ जायेंगे।” आदि पंक्तियों से देशप्रेम की अलख जगाई तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला प्रचारक रमेश चंद्र त्रिपाठी ने_
“हे जन्मभूमि भारत, हे कर्मभूमि भारत, हे वंदनीय भारत, अभिनंदनीय भारत”

आदि पंक्तियों की प्रस्तुति से माहौल में राष्ट्रभक्ति की धारा प्रवाहित कर दी।
इस अवसर पर डॉ. पीयूष कांत शर्मा, राजेश कुमार मिश्र, प्रभा शंकर पांडेय, धर्मेंद्र मिश्रा, संतोष शुक्ला, सुरेंद्र प्रसाद पांडेय, नितेश खंडेलवाल, प्रभात मिश्र आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। अंतिम में आरएसएस के जिला कार्यवाह डॉ. सौरभ पाण्डेय ने सभी के प्रति आभार एवं कृतज्ञता ज्ञापित किया।

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