Well Done | ठाणे जिला परिषद स्वास्थ्य विभाग की कोरोना नियंत्रण टीकाकरण टीम ने 16 किलोमीटर पहाड़ी क्षेत्र में पैदल जाकर किया टीकाकरण

by | Dec 14, 2021 | ठाणे, महाराष्ट्र

शहापुर : ठाणे जिला परिषद स्वास्थ्य विभाग की कोविड-19 नियंत्रण टीकाकरण टीम बुधवार को 16 किलोमीटर पहाड़ी क्षेत्र में उबड़ खाबड़ जमीन से पैदल चलकर सह्याद्री की तलहटी में स्थित दापुरमाल गांव पहुंची. गांव के प्रत्येक नागरिक के घर घर जाकर सभी पात्र ग्रामीणों का टीकाकरण किया. उन्होंने हर नागरिक के स्वास्थ्य की भी जांच की. ठाणे जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ.भाऊसाहेब दांगडे ने पूरी टीम को उनके साहसी और अविश्वसनीय और सराहनीय काम के लिए प्रशंसा की जा रही हैं.

दापुरमाल गाँव शहापुर तालुका के कसारा क्षेत्र में विहिगाँव उप-केंद्र के अंतर्गत स्थित है, यहां परिवहन का कोई साधन नहीं है. चिकित्सा अधिकारी डाॅ. हर्षल भोरे के साथ नामदेव फर्डे, बालू नीचिते, सुजाता भोईर, भारती ठाकरे , श्रीमती झुगरे , श्रीमती खोरगडे सोलह किमी. पैदल चलकर गए ताकि यहां के नागरिक टीकाकरण से वंचित न रहें.

गांव की कुल आबादी 246 है और कोविड-19 के टीकाकरण के लिए कुल 138 लाभार्थी थे, इसमें दो गर्भवती माताएं और तीन स्तनपान कराने वाली माताएं भी शामिल हैं. इन सभी लोगों का टीकाकरण करने के बाद स्वास्थ्य टीम ने यहां स्वास्थ्य शिविर भी लगाया. स्वास्थ्य शिविर के तहत बाल रोग, गर्भवती माता, स्तनपान कराने वाली माता, त्वचा रोगों की जांच की गई, जरूरतमंदों को दवाइयां और उचित मार्गदर्शन दिया गया.

ठाणे जिला परिषद का स्वास्थ्य विभाग कोरोना महामारी से बचाव के लिए ग्रामीण क्षेत्र के हर गांव, वाडी का टीकाकरण कर रहा है. जिले में कई जगह दुर्गम इलाके हैं, लेकिन जिला परिषद स्वास्थ्य विभाग उन इलाकों के नागरिकों को टीका लगाने की योजना बनाई है. जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष रेंगे ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में शत-प्रतिशत लाभार्थियों का टीकाकरण कर लोगों में जागरूकता पैदा करने और कोरोना के भय को कम करने का प्रयास किया जा रहा है.

● तीन माह पूर्व स्वास्थ्य अधिकारी दापुरमाल के दो पाडे में टीकाकरण के लिए गए थे. उसी समय कुछ ग्रामीण घर से बाहर चले गए थे. स्वास्थ्य टीम ने लोगो को टीकाकरण कराने को कहा. लेकिन किसी ने भी टीकाकरण नहीं कराया. इसलिए स्वास्थ्य टीम चिंतित थी. पाड़ा से दो युवक काम से कसारा रेलवे स्टेशन जा रहे थे, ट्रेन यात्रा के लिए कोरोना टीकाकरण आवश्यक है, इसलिए स्वास्थ्य टीम को सूचना मिली कि इन युवकों ने टीका लगाया है. स्वास्थ्य टीम ने युवक से बात की और एक आशा सेवक का भी टीकाकरण करवाया उसके बाद आशा सेविका और युवकों की माध्यम से स्वास्थ्य टीम ने टीकाकरण के बारे में जागरूकता फैलाना शुरू किया. टीकाकरण का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता यह बताया और आखिरकार तीन महीने बाद गांव के 18 साल से बड़े नागरिक टीकाकरण के लिए तैयार हो गए और उनका टीकाकरण किया गया.

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