दोबारा यूपी फतह करते ही मोदी के बाद प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार है योगी आदित्यनाथ,लोगो की पसंद के साथ भाजपा के भी यही संकेत

by | Nov 23, 2021 | उत्तर प्रदेश, लखनऊ

कम समय में योगी मीडिया से लेकर तमाम राजनीतिक गलियारों में छाए हुए हैं. जहां भी जाओ योगी की ही चर्चा होती है. बीजेपी के नेता हो या मंत्री, तमाम लोग उनके कामकाज की तारीफ करते हुए चर्चा करते हैं. साथ-साथ विपक्ष के नेता भी उन्हीं के बारे में बतियाते दिखते हैं. सभी की जुबान से यही निकलता है योगी अच्छा काम कर रहे हैं. योगी जहां भी जाते हैं आकर्षण का केंद्र रहते हैं. कल वह नीति आयोग की बैठक में भाग लेने के दिल्ली आए तो पूरी मीडिया का आकर्षण का केंद्र योगी आदित्यनाथ थे. जबकि वहां पर बहुत राज्यों के मुख्यमंत्री आए थे, लेकिन कैमरा योगी को ढूंढ रहा था.
राजनीतिक गलियारों में तो योगी के काम करने की तुलना मोदी से होने लगी है. राजनीतिक जानकार तो यह भी कहने लगे हैं कि मोदी के बाद का नेता योगी के तौर पर उनको मिल गया है. बीजेपी और विपक्ष के नेता यह भी चर्चा करते हैं कि मोदी और योगी की मेहनत और तरीका मिलता है.प्रधानमंत्री बनने से पहले जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, वह भी इसी प्रकार मीडिया और सबके आकर्षण का केंद्र रहा करते थे. जब वह गुजरात से दिल्ली आते थे तो मीडिया की नजर हमेशा उनको ढूंढती रहती थी. उसी प्रकार योगी भी मुख्यमंत्री बनने के बाद खास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. योगी कुछ भी करते हैं वो मीडिया के लिए खबर होती है.
मुख्यमंत्री बनने से पहले योगी आदित्यनाथ की छवि बेशक कट्टर हिंदूवादी नेता की रही है और उसी अंदाज में उनके भाषण और काम दिखाई देते थे. लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद वह मोदी के एजंडे पर काम कर रहे हैं. सबका साथ सबका विकास के नारे को उन्होंने उत्तर प्रदेश में लागू करने की कोशिश की है.

जनवरी के बीच हुए सर्वे में 67 फीसदी गांव के लोग और 33 फीसदी शहरी आबादी को शामिल किया गया था – और जब सवाल हुआ कि नरेंद्र मोदी के बाद लोग किसे प्रधानमंत्री के तौर पर देखना चाहते हैं तो सबसे ज्यादा पसंदीदा दो नाम सामने आये – केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath).

कोई सर्वे में मालूम हुआ है कि देश के 38 फीसदी लोग जहां अगले प्रधानमंत्री के रूप पर नरेंद्र मोदी को ही देखना चाहते हैं, वहीं, 10 फीसदी लोग योगी आदित्यनाथ और 8 फीसदी लोग अमित शाह को प्रधानमंत्री बनाये जाने के पक्ष में हैं.

सवाल ये है कि जब मोदी कैबिनेट के बेहतरीन मिनिस्टर अमित शाह हैं तो वो प्रधानमंत्री पद को लेकर लोगों के बीच नरेंद्र मोदी के बाद पहली पसंद क्यों नहीं बन पा रहे हैं?

धारा 370 और सीएए कानून बनाने से लेकर लॉकडाउन की गाइडलाइन तैयार करने और उसे लागू कराने की भी जिम्मेदारी अमित शाह की ही रही. लोगों का मानना है कि अमित शाह ने ये सारे काम सबसे अच्छे से किया, लेकिन फिर भी लोग प्रधानमंत्री के रूप में अमित शाह पर योगी आदित्यनाथ को तरजीह क्यों दे रहे हैं?

नरेंद्र मोदी भी मुख्यमंत्री के रूप में काम करने के बाद ही प्रधानमंत्री बने हैं जबकि योगी आदित्यनाथ अभी मुख्यमंत्री हैं – दोनों में एक कॉमन बात ये भी है कि दोनों पहली बार सीधे मुख्यमंत्री ही बने हैं. हालांकि, योगी आदित्यनाथ पहले पांच बार लोक सभा सांसद भी रह चुके हैं – और नरेंद्र मोदी सांसद बनने से पहले ही बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित कर दिये गये थे.

अगर योगी आदित्यनाथ और अमित शाह के राजनीतिक दायरे की बात करें तो अमित शाह 2014 के बाद राष्ट्रीय राजनीति में आये हैं और उस वक्त योगी आदित्यनाथ पांचवीं बार संसद पहुंचे थे. हालांकि, संसद में उनकी मौजूदगी के तौर पर उनका फूट फूट कर रोना ही लोगों को याद है.

2014 से पहले अमित शाह की राजनीति गुजरात तक ही सीमित रही और गुजरात से बाहर अगर उनकी चर्चा रही तो सिर्फ विवादों की वजह से. आम चुनाव से पहले अमित शाह यूपी पहुंचे और फिर चुनावी जीत के बाद बीजेपी के अध्यक्ष बने – बतौर अध्यक्ष बीजेपी को सबसे बड़ी पार्टी बनाने का क्रेडिट भी अमित शाह को हासिल है.

अमित शाह का ज्यादातर वक्त संगठन की मजबूती और चुनाव जीतने में बीता है, जबकि योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बनने से पहले अपने कुछ विवादित कार्यक्रमों को लेकर चर्चित रहे हैं – लव जिहाद और घर वापसी. हिंदु युवा वाहिनी की स्थापना का मकसद भी यही रहा है और उसी की बदौलत योगी आदित्यनाथ ने अपना जनाधार बढ़ाने में कामयाबी हासिल की. माना तो यहां तक जाता है कि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने में भी उसी का सबसे ज्यादा योगदान रहा है.

आखिर अमित शाह जब लोगों की नजर अच्छे पॉलिटिकल एडमिनिस्ट्रेटर माने जा रहे हैं तो प्रधानमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ क्यों चाहिये – जिनके शासन पर लगातार उंगलियां उठ रही हैं, कानून व्यवस्था का बुरा हाल है. यूपी पुलिस का अगर कोई काम अच्छा है तो वो है हर किसी के दिमाग में पहले नंबर पर एनकाउंटर ही आता है – भले ही गोली खत्म हो जाने पर पुलिस वाले मुंह से ही ठांय-ठांय आवाज लगायें या फिर आरोपियों को एक जगह से दूसरी जगह ले जा रही गाड़ी चलते चलते पलट जाये. जब भी सीबीआई यूपी के अपराध की जांच करती है तो पुलिस की कलई खुल जाती है – उन्नाव और हाथरस गैंगरेप के दोनों मामलों में ऐसा ही देखने को मिला है.

क्या कट्टर हिंदुत्व की राजनीति में योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता अमित शाह पर भारी पड़ रही है? नाथ संप्रदाय के अनुयायियों के बीच गोरक्षपीठ का महंत होना योगी आदित्यनाथ का एक अलग जनाधार है और उसी के चलते वो देश भर में जगह जगह बीजेपी के स्टार प्रचारक बने हुए हैं – तभी तो उम्र में 20 साल छोटे और बीजेपी के सबसे जूनियर मुख्यमंत्री होने के बावजूद छत्तीसगढ़ चुनाव में प्रचार के लिए पहुंचे तो तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह को योगी आदित्यनाथ के पैर छुते देखा – क्या देश प्रधानमंत्री पद के लिए अपना नजरिया लगातार बदल रहा है?

भाजपा की एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजनीतिक प्रस्ताव पेश किया। अब तक राजनीतिक प्रस्ताव पेश करने का काम पार्टी के वरिष्ठ नेता किया करते थे। 2017/18 की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यह प्रस्ताव पेश किया था। लेकिन इस बार बैठक में राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी जैसे वरिष्ठ नेताओं के होने के बावजूद यह भूमिका योगी आदित्यनाथ को सौंपकर पार्टी ने एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है। एक तरफ उसने चुनाव के समय प्रदेश की जनता के बीच मुख्यमंत्री के राजनीतिक कद को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते जाने का संकेत दिया है । अगर फिर से योगी के नेतृत्व में बहुमत से यूपी फतह कर लेते है योगी तो ये पक्का है कि मोदी के बाद प्रधानमंत्री के लिए योगी का नाम सबसे ऊपर रहेगा जिसे भाजपा भी सहर्ष स्वीकार कर लेगी ।

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