पालघर | शातिर जालसाजों ने 3 राज्यो में फैला रखा था अपना नेटवर्क, भोपाल सायबर क्राइम पुलिस ने किया गिरोह का भंडाफोड़,गिरफ्तार

by | Oct 17, 2021 | पालघर, महाराष्ट्र, वसई विरार

मध्यप्रदेश भोपाल की सायबर क्राइम पुलिस ने अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दो ऐसे शातिर जालसाजों को गिरफ्तार किया है जो मनी ट्रांसफर की दुकानों से हजारों रुपए ट्रांसफर कराने के बाद बिना पैसा दिए ही फरार हो जाते थे। यह लोग पैसा ट्रांसफर होने के बाद कॉल करने का बहाना बनाकर दुकानदार का ध्यान भटका देत थे। उत्तर प्रदेश व महाराष्ट्र के अलावा आरोपी मध्य प्रदेश के कई शहरों में करीब 100 लोगों को निशाना बना चुके हैं। आरोपियों ने भोपाल के निशातपुरा व ऐशबाग थाना क्षेत्रों में इस प्रकार की वारदातों को अंजाम दिया था।

एएसपी सायबर क्राइम अंकित जायसवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि भोपाल निवासी अमित यादव एमपी ऑनलाइन की कियोस्क सेंटर के संचालक हैं। वह राओनेट कंपनी के पोर्टल से मनी ट्रांसफर करते हैं। विगत 12 अक्टूबर की दोपहर करीब तीन बजे दो लड़के फरियादी अमित की दुकान पर आए थे। उन्होंने कहा कि उन्हें 15 हजार रुपए ट्रांसफर कराना है। कुछ देर बाद उनमें से एक लड़का दुकान के बाहर चला गया था। दुाकन के अंदर खड़े लड़के ने अपनी जेब से पैसे निकालकर गिनना शुरू किए और गिनकर 15 हजार रुपए सामने टेबल पर रख दिए। एक बार फरियादी ने भी पैसे गिने और कन्फर्म होने के बाद पैसा बताए खाते में ट्रांसफर कर दिया। इस बीच अमित यादव चार्जर उठाने के लिए जैसे ही नीचे झुका, वह लड़का टेबल पर रखे 15 हजार रुपए लेकर फरार हो गया। उसका साथी दुकान के बाहर एक्टिवा लिए तैयार खड़ा था। कियोस्क सेंटर संचालक ने इस मामले में शिकायती आवेदन सायबर सेल में किया था। लिहाजा पुलिस ने जांच व तकनीकी जानकारी के आधार पर आरोपी का मोबाइल नंबर व खाते का इस्तेमाल करने वाले के खिलाफ चोरी व धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

कॉल कर भटकाते थे दुकान का ध्यान :

सायबर क्राइम पुलिस ने थाना हनुमानगंज पुलिस के सहयोग से तकनीकी विश्लेषण के आधार पर दोनों आरोपियों राजेश नागवानी उर्फ राजेश छू उर्फ कबरा निवासी नाला सोपारा जिला पालघर व दीपेश इन्द्रपाल सतनामी निवासी नाला सोपारा जिला पालघर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक मोबाइल फोन, दो बैंक एटीएम कार्ड व दो सिम कार्ड जब्त किए हैं। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे कियोस्क सेंटर की तलाश करते थे। फिर दोनों दुकान के अंदर जाकर मुआयना करते थे। उसके बाद एक व्यक्ति बाहर आकर एक्टिवा पर बैठ जाता था। दुकान के अंदर वाला आरोपी पैसा ट्रांसफर कराता था और पैसा ट्रांसफर हुआ अथवा नहीं, यह कन्फर्म करने का बहाना बनाकर फोन करता था। दुकानदार का ध्यान भटकते ही पैसा दिए बिना या टेबल पर रखा पैसा लेकर फरार हो जाता था।

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