महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता व विधायक राजू पाटिल ने शहर में कचरे की समस्या को लेकर अंबरनाथ नगर निगम के मुख्याधिकारी से मुलाकात की

by | Sep 7, 2021 | ठाणे, महाराष्ट्र

मिथिलेश गुप्ता
अंबरनाथ : महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता व विधायक राजू पाटिल ने अंबरनाथ नगर निगम के मुख्याधिकारी से मुलाकात की शहर में कचरे की समस्या को लेकर चर्चा की । अंबरनाथ नगर निगम ने हाल ही में एक आदेश जारी कर घोषणा की थी कि वह 100 फ्लैटों वाले परिसरों से गीला कचरा नहीं उठाएगा। नागरिकों के विरोध के बाद प्रशासन ने फैसला बदल दिया। पीएसएल वेस्ट मॅनेजमेंट एलएलपी’ कंपनी के प्रतिनिधी पिछले कुछ दिनों से अंबरनाथ में घर घर जा रहे हैं, उनका दावा है कि वे घरेलू कचरे का प्रबंधन कर रहे हैं।

मण्डली निवासियों को प्रति परिवार प्रति माह 400 रुपये चार्ज करके कचरे का प्रबंधन करने का प्रस्ताव दे रही है। एक तरह से यह जिजिया टैक्स है। 400 रुपये प्रति माह और 4,800 प्रति वर्ष।नगरपालिका प्रशासन पहले से ही निवासियों से 400 घरेलू कचरा प्रबंधन शुल्क लेता है। इसमें अब बस इतना ही है। बदले में, नगरपालिका वर्तमान में डंपिंग ग्राउंड पर कचरे को डंप करने के अलावा कुछ भी प्रबंधित नहीं करती है। दरअसल, नगर पालिका को गीला और सूखा कचरा प्रबंधन परियोजना स्थापित करने की जरूरत है।

अन्य शहरों में इस तरह के प्रोजेक्ट एनजीओ की मदद से चलाए जा रहे हैं। वर्तमान में अंबरनाथ नगर निगम क्षेत्र में ऐसी कोई परियोजना लागू नहीं की जा रही है। शहर में यूडीटीपी और कोका-कोला का एक प्रोजेक्ट चल रहा था। लेकिन वह भी अब बंद है। इस तरह कचरा प्रबंधन में शून्य प्रगति करने वाला निगम नागरिकों को बंधक बना रहा है. एक निजी संस्था के माध्यम से कचरा प्रबंधन के लिए प्रति माह 400 रुपये चार्ज करना जजिया कर लगाने के समान होगा। कचरा प्रबंधन में निगम फेल हो गया है, उसका खामियाजा करदाताओं को क्यों भुगतना पड़े ? संबंधित एजेंसी को यह नौकरी किसने दी ? रेट किसने तय किया? क्या नगर पालिका ने कंपनी के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया पाने के लिए नागरिकों पर कचरे का प्रबंधन करने का दबाव नहीं डाला ? इस संबंध में ऐसे कई मुद्दे उठाए जा रहे हैं। प्रशासन को इस संबंध में अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए।
चिखलोली में स्थल पर एक ठोस कचरा प्रबंधन परियोजना स्थापित की जानी चाहिए, जो नगरपालिका अपशिष्ट प्रबंधन के लिए आरक्षित है, ताकि भविष्य में स्थानीय लोगों को परेशानी न हो।भविष्य में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाओं को लागू करने वाले आवास परिसरों को टैक्स में रियायतें दी जाएंगी। नगर पालिका को आवास परिसरों के प्रबंधन के लिए बाध्य नहीं करना चाहिए और उन परिसरों को छह महीने की अवधि देनी चाहिए। इस अवधि के दौरान आवास परिसर के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की लागत की योजना बनाई जा सकती है। नहीं तो महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना द्वारा शहर में आंदोलन किया जाएगा ।

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