कोरोना से अनाथ हुए बच्चो को मिलेंगे 10 लाख रुपये,पीएम केयर फॉर चिल्ड्रन में ऐसे करे आवेदन

by | Jul 29, 2021 | कोविड 19, देश/विदेश

कोरोना महामारी में बहुत सारे लोगों ने अपनी जानें गंवाई हैं. बहुत सारे बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठ गया. ऐसे बच्‍चों की मदद के लिए केंद्र सरकार ने ‘पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन’ योजना की शुरुआत की है. ऐसे बच्चों को 23 साल की उम्र होने पर सरकार 10 लाख रुपये की मदद करेगी. इसके साथ ही स्वास्थ्य बीमा के माध्यम से उनके कल्याण की व्यवस्था की जाएगी, उन्हें शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाया जाएगा. साथ ही 23 साल की उम्र पर पहुंचने पर उन्हें 10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मिलेगी.

इस योजना के जरिए बच्चों को सहायता पहुंचाने के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इस योजना के तहत ही महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने आवेदन देने और सहायता हासिल करने के लिए पात्र बच्चों की पहचान करते हुए उन्हें लाभ पहुंचाने के लिए pmcaresforchildren.in पर आवेदन आमंत्रित किए गए हैं.
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों/सभी केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों से 22 जुलाई को एक पत्र में कहा कि वे अपने राज्यों के जिलाधिकारियों को निर्देश दें कि वे ‘पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन’ योजना के तहत सहायता हासिल करने के लिए पात्र बच्चों की पहचान करें और पोर्टल पर पात्र बच्चों का विवरण डालें, ताकि उन्हें तुरंत सहायता मिल सके. उन्हें बच्चों के पंजीकरण के लिए कदम उठाने की भी सलाह दी गई है, जिसके बारे में विस्तार में जानकारी दी गयी है. यह कार्य अगले 15 दिनों में पूरा करने किया जाएगा.

बनाया गया है हेल्प डेस्क, ईमेल से भी मिलेगी मदद

इस उद्देश्य के लिए एक समर्पित हेल्प डेस्क स्थापित किया गया है, जिस पर टेलीफोन द्वारा 011-23388074 पर या ईमेल pmcares-child.wcd@nic.in पर संपर्क किया जा सकता है. मंत्रालय ने राज्यों के मुख्य सचिवों/केंद्र शासितप्रदेशों के प्रशासकों से व्यक्तिगत रूप से पोर्टल में डेटा प्रविष्टि की प्रगति की निगरानी करने का अनुरोध किया है. इस योजना के अंतर्गत 11 मार्च 2020 से महामारी के अंत तक ऐसे बच्चों को शामिल किया जाएगा.

जागरूकता और पहचान की प्रक्रिया

जिला मजिस्ट्रेट पुलिस, डीसीपीयू, चाइल्ड लाइन और नागरिक समाज संगठनों की सहायता से इन बच्चों की पहचान के लिए अभियान चलाएंगे. ग्राम पंचायतों, आंगनबाड़ी और आशा नेटवर्क को ऐसे बच्चों की रिपोर्ट देने के लिये कहा जा सकता है.

इस बारे में आम जनता को सूचित करने और उन्हें सीडब्ल्यूसी (बाल कल्याण समिति) के समक्ष ऐसे बच्चों को पेश करने या चाइल्ड लाइन (1098) या जिला बाल संरक्षण इकाई (डीसीपीयू) के माध्यम से उनके बारे में रिपोर्ट के लिए प्रोत्साहित करने के लिए स्थानीय भाषा में पहचान अभियान के बारे में पर्याप्त प्रचार किया जा सकता है.
कैसे भरा जा सकता है आवेदन?

योजना के तहत सहायता प्राप्त करने के लिए आवेदन पत्र, बच्चे के द्वारा, देखभाल करने वाले के द्वारा या फिर सीडब्ल्यूसी के सामने बच्चे को पेश करने वाली किसी अन्य एजेंसी के द्वारा भरा जा सकता है.

सीडब्ल्यूसी डीसीपीयू की मदद से उस बच्चे के बारे में तथ्यों को इकट्ठा करेगा, जिसने माता-पिता दोनों को खो दिया है, इसमें मृतक माता-पिता, घर का पता, स्कूल, कॉन्टैक्ट की जानकारी, क्रेडेंशियल और परिवार के दूर के सदस्यों, रिश्तेदारों या निकट संबंधियों की वार्षिक आय का विवरण शामिल है.

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