पालघर | सरक्षंण का अनूठा ढंग, तेंदुओं की पूजा करते है ग्रामीण,बाघ देवता वाघोबा का अहम स्थान …

by | Jul 14, 2021 | पालघर, महाराष्ट्र

पालघर : अक्सर मानव-वन्यजीव संघर्ष होता रहता है, जिसके चलते दोनों को नुकसान झेलना पड़ता है। यह संघर्ष उन इलाकों में और बढ़ जाता है, जहां वन्यजीव और लोग एक दूसरे के अधिक करीब रहते हैं। इसके विपरीत एक अध्ययन से पता चलता है कि पालघर में कुछ लोग हैं, जो वन्यजीवों के निकट ही रहते हैं और इनके संरक्षण में अहम भूमिका निभाते हैं। इन लोगों ने वन्यजीवों को अपनी संस्कृति में अहम स्थान दिया है। वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन सोसाइटी (डब्ल्यूसीएस) की अगुवाई में किया गया नया अध्ययन इस बात की तस्दीक करता है कि आम लोग और तेंदुए एक दूसरे के आसपास रहते हैं। पालघर के ग्रामीण इन्हें देवता के समान मानते हैं और इनकी पूजा करते हैं।
अध्ययन बताता है कि वन्यजीवों के साथ रहकर कैसे एक दूसरे को नुकसान पहुंचाए बिना जीवन व्यतीत किया जा सकता है। कैसे पालघर के स्थानीय वारली लोग सुरक्षा के लिए तेंदुए यानी बाघ देवता की वाघोबा के रूप में पूजा करते हैं। कैसे वे सदियों से तेंदुओं और बाघ के साथ-साथ रहते आए हैं। शोधकर्ताओं ने वाघोबा की पूजा के लिए बने 150 से अधिक मंदिरों की पहचान की है। शोधकर्ताओं ने इस बात पर गौर किया कि तेंदुओं के बारे में अक्सर लोगों की सोच ठीक नहीं होती है। खासकर तेंदुओं के द्वारा पालतू पशुओं को मारने के मामलों में इसे देखा जाता है। इसके विपरीत, अध्ययनकर्ताओं का मानना है कि तेंदुओं को वाघोबा के रूप में अधिक स्वीकार किए जाने की संभावना है।
वारली लोग पारस्परिक संबंधों में विश्वास करते हैं। उनका मानना है कि वाघोबा उन्हें बड़ी बिल्लियों के साथ अपनी जगह को साझा करने में सहायक होंगे और उनके बुरे प्रभावों से बचाएंगे। उनका मानना है कि यह तभी संभव है, जब लोग देवता की पूजा करते हैं और आवश्यक अनुष्ठान करते हैं, खासकर साल भर में मनाए जाने वाले वाघ बरस के उत्सव में। शोधकर्ताओं का सुझाव है कि लोगों और तेंदुओं के बीच इस तरह के संबंध उनकी जगहों को एक दूसरे से साझा करने की सुविधा प्रदान करते हैं। इसके अलावा, अध्ययन उन तरीकों पर भी गौर करता है, जिनमें उस इलाके में संस्थानों और हितधारकों की श्रेणी वाघोबा जैसी संस्था को आकार देती है और इस तरह के परिदृश्य में लोगों और तेंदुए के रिश्ते में अहम भूमिका अदा करती है।
यह अध्ययन जर्नल फ्रंटियर्स इन कंजर्वेशन साइंस नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन के लिए 2018-19 में महाराष्ट्र के मुंबई उपनगरीय, पालघर और ठाणे जिलों में फील्डवर्क किया गया था। वहां रहने वाले लोगों की वन्यजीव संबंधी संस्कृति और उनको देखने के तरीकों के आधार पर आंकड़ों को एकत्र किया गया। शोधकर्ताओं ने साक्षात्कार आयोजित किए और वाघोबा मंदिरों के दस्तावेजीकरण के साथ-साथ प्रतिभागियों का भी अवलोकन किया गया।
अध्ययन में विशेष रूप से पूजा समारोहों में भाग लेना और उन्हें आयोजित करना आदि शामिल था। वारली के जीवन में वाघोबा की भूमिका, वाघोबा पूजा के इतिहास, संबंधित त्योहारों, अनुष्ठानों, परंपराओं और वाघोबा और मानव-तेंदुए के बीच संबंधों पर कथाओं का पता लगाने के लिए भी लोगों से प्रश्न पूछे गए थे। यह खबर एक मीडिया वेबसाइट से प्रतिपादन की गई है ।

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