अब देशभर में जल्द ही दूर हो जाएगी रेमडिसवीर इंजेक्शन की किल्लत, बोईसर की इस कंपनी में रोजाना 90 हज़ार से 1 लाख इंजेक्शन बनाए जा रहे है

by | May 14, 2021 | पालघर, महाराष्ट्र

हेडलाइंस18 नेटवर्क
पालघर : देशभर में कोरोना का कहर जारी है जिसमे ज्यादा प्रभावित महाराष्ट्र सहित पांच राज्य है.कोविड के इस जंग में संजीवनी बूटी बनकर काम कर रही दवा रेमडेसिवीर की देशभर से मांग है मांग इस तरह बढ़ी की कई जगहों पर ब्लैक मार्केटिंग होने लगी। लोग कई गुना पैसे देकर इंजेक्शन खरीदने लगे कुछ जगहों पर सप्लाई करने वाली फार्मा कंपनियों के बाहर लंबी कतार लगने लगी ,नकली रेमडेसिविर पकड़ी जाने लगीं। इन सभी स्थितियों को व बढ़ती मांग को देखते हुए देश के ज्यादातर जिलों में कलेक्टर की निगरानी में रेमडेसिवीर बिकने लगी हैं, अब जिस तरह से दवा कंपनियों ने प्रोडक्शन बढ़ाया है उसे देखकर अब जल्द ही रेमडेसिविर की समस्या दूर हो जाएगी
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक देश में 7 बड़ी कंपनियां कोरोना में संजीवनी का काम करने वाली रेमडेशिविर बनाती हैं और ये कम्पनियां आगे कई कंपनियों को इंजेक्शन बनाने के लिए देती हैं। पालघर जिले के बोईसर एमआईडीसी तारापुर स्थित कमला लाइफ साइंसेज़ लिमिटेड की फैक्ट्री में रोजाना 90 हज़ार से 1 लाख रेमडिसवीर इंजेक्शन बनाए जा रहे हैं।


सिप्ला कंपनी का अधिकतर रेमेडिसवीर इंजेक्शन का निर्माण बोईसर के इसी कमला लाइफ साइंस फैक्ट्री में किया जा रहा है। इस रेमडेसीवीर इंजेक्शन के निर्माण की पूरी प्रक्रिया बहुत जटिल और लंबी है-इसमें कुल 10 स्टेप्स हैं, निर्माण से लेकर पैकेजिंग और ट्रांसपोर्टेशन तक ये प्रोसेस इस प्रकार होता है इसमें ज्यादातर काम ऑटोमेटिक मशीनों के द्वारा संचालित होता है। दवाई प्रोडक्शन यूनिट में साफ सफाई का पूरा ख्याल रखा जाता है। यहां दवा तैयार करने के लिए सोल्यूशन प्रिपरेशन में एक गेट से कोई जाता है तो दूसरे से सॉल्यूशन जाता है। सबसे पहले इंजेक्शन के सॉल्यूशन को बनाया जाता है। फिर वायल को हाई एंड मशीन से साफ किया जाता है, फिर इन वायल को मशीनों के जरिये सुखाया जाता है। फिर इसमें रेमडेसीवीर का सल्यूशन भरने का काम भी मशीन ही करती है। फिर इस वायल पर डबल कैपिंग होती है। इसके बाद सीलिंग होती है- वायल में इंजेक्शन भरने के बाद वायल को एक्सटर्नल वाश किया जाता है। ये सारा काम मशीन ही करती है। इसमे इंसान के हाथ नहीं लगते।इसके बाद वायल वाशिंग, ड्रॉइंग और ऑटोमेटिक फिलिंग के बाद वायल कैपिंग और सीलिंग होती है ये सबकुछ ऑटोमेटिक मशीनों से होता है जिससे कि कोई गड़बड़ी न हो इसके बाद वायल एक्सटर्नल वाशिंग और वायल इंस्पेक्शन होता है। इसके बाद कैरेट में भरकर वायल लेबलिंग के लिए ले जाया जाता है जहां मैन्युफैक्चरिंग डेट से लेकर एक्सपायरी डेट और प्राइस और बार कोड लगाया जाता है इस दौरान तमाम सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखा जाता है। दिन रात प्रॉडक्शन में जुटी दवाई कंपनी के इस प्रयास से देश मे रेमडेसीवीर की कमी को जल्द ही पूरा किया जाएगा,आने वाले समय मे अब किल्लत का सामना नही करना पड़ेगा ।

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