असरदार है कोरोना वैक्सीन,टीका लगवाने वाले 10,000 में से सिर्फ चार लोगों को हुआ है संक्रमण

by | Apr 22, 2021 | कोविड 19, देश/विदेश

देश में जानलेवा कोरोना वायरस के मामले दिन पर दिन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहे हैं. देश में कोरोना के खिलाफ टिकाकरण अभियान भी तेजी से चल रहा है और अबतक 13 करोड़ से ज्यादा लोगों को वैक्सीन की डोज दी जा चुकी हैं. इस बीच कोवैक्सीन को लेकर बड़ी खबर आई है. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने अपनी रिसर्च में कहा है कि कोरोना वैक्सीन कोवैक्सीन ज्यादातर वैरियंट पर असरदार है.इस वैक्सीन को लेकर बहुत-से संशय लोगों के मन में हैं, जिन्हें दूर करने के लिए सरकार ने बुधवार को आंकड़े जारी किए, जिनके मुताबिक, अब तक केवल 0.02 प्रतिशत से 0.04 प्रतिशत लोगों को ही वैक्सीन लेने के बावजूद संक्रमण हुआ है, यानी 10,000 वैक्सीन लेने वालों में से अधिकतम दो से चार व्यक्ति ही संक्रमित हुए हैं. वैक्सीनेशन हो जाने के बाद भी कोविड संक्रमण हो जाने को ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन कहा जाता है.

कोरोना के अलग-अलग वैरिएंट से लड़ सकती है कोवैक्सीन

आईसीएमआर ने अपनी रिसर्च में दावा किया है कि कोवैक्सीन कोरोना के अलग-अलग वैरिएंट से लड़ सकती है. आईसीएमआर ने बताया है कि ये वैक्सीन कोरोना के डबल म्यूटेंट स्ट्रेन से भी लड़ने में कारगर है. हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक द्वारा बनाई गई कोवैक्सीन (COVAXIN) नामक वैक्सीन अब तक स्वदेश में तैयार हुई एकमात्र वैक्सीन है.

मोदी सरकार बढ़ाएगी वैक्सीन उत्पादन की क्षमता

भारत में कोरोना के हालात को देखते हुए मोदी सरकार ने अब इस स्वदेशी वैक्सीन की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए क़दम बढ़ाया है. आत्मनिर्भर भारत मिशन 3.0 के तहत चलाए जा रहे मिशन कोविड सुरक्षा के ज़रिए स्वदेश में बने वैक्सीन के विकास और उत्पादन में तेज़ी लाने के लिए सहायता दिए जाने का प्रावधान किया गया है. इसी के तहत केंद्र सरकार के बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने भारत बायोटेक कम्पनी को 65 करोड़ रुपये की सहायता अनुदान के तौर पर देने का फ़ैसला किया है. इस पैसे का इस्तेमाल बेंगलुरू में बने भारत बायोटेक के नए सेंटर में वैक्सीन उत्पादन की क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाएगा.

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