कोठारी बंधुओं के नाम होगी अयोध्या में सड़क, बलिदान को मिलेगा सम्मान, जानिए कौन थे राम कुमार और शरद

by | Apr 8, 2021 | उत्तर प्रदेश, देश/विदेश

शिवशंकर शुक्ला

यूपी के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने घोषणा की है कि कार सेवा के दौरान पुलिस की गोली से मारे गए कोठारी बंधुओं के नाम पर अयोध्या में सड़क बनवाई जाएगी। कोठारी बंधुओं की हत्या अक्टूबर 30, 1990 को कर दी गई थी। पश्चिम बंगाल में कई चुनावी रैलियों के दौरान भी भाजपा नेताओं ने बंगालियों को अयोध्या में भव्य राम मंदिर के लिए कोठारी बंधुओं के बलिदान की याद दिलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बंगाल की जनता को कोठारी बंधुओं का बलिदान याद दिलाया था। उन्होंने कहा था कि दोनों बलिदानियों के नाम पर अयोध्या में अभी भी एक स्मारक है। उन्होंने कहा था कि कोठारी बंधुओं के भव्य राम मंदिर का स्वप्न आज पीएम नरेंद्र मोदी पूरा कर रहे हैं। राम और शरद कोठारी कारसेवा के दौरान भगवा ध्वज के साथ विवादित ढाँचे के ऊपर चढ़े थे। तब उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी।

कौन हैं कोठारी बंधु, जिनके नाम पर अयोध्या में होगी सड़क

साल था 1990 और महीना था दिसंबर। पहले हफ्ते के एक दिन डाकिया आज के कोलकाता और तब के कलकत्ता के खेलत घोष लेन स्थित एक घर में पोस्टकार्ड लेकर पहुॅंचता है। बकौल पूर्णिमा कोठारी, “चिट्ठी देख मैं बिलख पड़ी। उसने मॉं और बाबा का ध्यान रखने को लिखा था। साथ ही कहा था कि चिंता मत करना हम तुम्हारी शादी में पहुॅंच जाएँगे।” यह पत्र था पूर्णिमा के भाई शरद कोठारी का जो अपने बड़े भाई रामकुमार के साथ अयोध्या में 2 नवंबर को ही शहीद हो चुके थे। दोनो भाइयों के साथ कोलकाता से अयोध्या के लिए निकले राजेश अग्रवाल के मुताबिक, वे 30 अक्टूबर को तड़के 4 बजे अयोध्या पहुॅंंचे। वे बताते हैं कि मस्जिद की गुंबद पर भगवा ध्वज फहरा कोठारी बंधुओं ने उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव की दावे की हवा निकाल दी थी। मुलायम ने कहा था, “वहॉं परिंदा भी पर नहीं मार सकता।” फिर आया 2 नवंबर का दिन। दोनों भाई विनय कटियार के नेतृत्व में दिगंबर अखाड़े की तरफ से हनुमानगढ़ी की ओर बढ़ रहे थे। जब सुरक्षा बलों ने फायरिंग शुरू की तो दोनों पीछे हटकर एक घर में जा ठहरे। CRPF के एक इंस्पेक्टर ने शरद को घर से बाहर निकाल सड़क पर बिठाया और सिर को गोली से उड़ा दिया। छोटे भाई के साथ ऐसा होते देख रामकुमार भी कूद पड़े। इंस्पेक्टर की गोली रामकुमार के गले को भी पार कर गई। दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। उनकी अंत्येष्टि में सरयू किनारे हुजूम उमड़ पड़ा था। बेटों की मौत से हीरालाल को ऐसा आघात लगा कि शव लेने के लिए अयोध्या आने की हिम्मत भी नहीं जुटा सके। दोनों का शव लेने हीरालाल के बड़े भाई दाऊलाल फैजाबाद आए थे और उन्होंने ही दोनों का अंतिम संस्कार किया था। भाइयों की याद में पूर्णिमा उनके दोस्त राजेश अग्रवाल के साथ मिलकर ‘राम-शरद कोठारी स्मृति समिति’ नाम से एक संस्था चलाती हैं। अब दोनों के नाम पर अयोध्या में सड़क भी होगी।

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