मजदूर जिन हालातो में गाँव गए उन्ही परेशानियों के साथ लौट रहे है वापस

by | Sep 4, 2020 | ठाणे, महाराष्ट्र, मुंबई

मिथिलेश गुप्ता

भिवंडी – कोरोना महामारी संकट काल में  लॉकडाउन लागू किया गया है जिसकारण काम-धंधा बंद होने के कारण भारी संख्या में मजूदर यहां से अपने गृह प्रदेश चले गए थे ।उत्तर प्रदेश एवं बिहार  सहित  आदि राज्यों के विभिन्न जिलों में जाने के लिए ट्रेन आदि की कोई व्यवस्था न होने के कारण मजदूर मई-जून महीने की तपती धूप में अपने बाल-बच्चों के साथ पैदल ही चल दिए थे।और जिन मजदूरों के पास किराया देने के लिए कुछ पैसा था वह मजदूर  3 से 4 हजार रुपया देकर भारी परेशानी सहते हुए जानवरों की तरह ट्रक एवं टेंपो में बैठकर गए थे , लेकिन वे मजदूर फिर वापस आने लगे हैं। उत्तर प्रदेश से आने के लिए ट्रेनों की काफी कम सुविधा होने के कारण मजदूर अनेक प्रकार की परेशानी उठाते हुए   गए थे  पुनः उन्ही परेशानियों के साथ फिर वापस आ रहे हैं ।

   उल्लेखनीय है कि  लॉकडाउन के कारण जब मजदूरों ने यहां से पैदल जाना शुरू किया तो सरकार द्वारा विशेष श्रमिक ट्रेन चलाकर उनके गृह प्रदेश उत्तर प्रदेश,बिहार,राजस्थान एवं कर्नाटक आदि पहुंचाया गया था । उस समय राज्य सरकार द्वारा महाराष्ट्र की सीमा तक एसटी महामंडल की बसों से भी मजदूरों को पहुंचाया  गया था ।लॉकडाउन में काम-धंधा बंद होने के कारण जो मजदूर चले गए थे वह काम धंधा शुरू होने की जानकारी मिलते ही वह मजदूर अब पुनः  आना शुरू कर दिए हैं। कोरोना संक्रमण के कारण लखनऊ,गोरखपुर एवं वाराणसी आदि स्टेशनों से काफी कम संख्या में ट्रेने आ रही हैं , जिसके कारण वहां से आने वाले लोगों विशेष रूप से  मजदूरों को ट्रेन से आने के लिए टिकट नहीं मिल पा रहा है। जाने के लिए ट्रेन बंद होने कारण मजदूरों के यहां से जाते समय जिसका फायदा बस,ट्रक एवं टेंपो वाले उठाए थे। उसी का फायदा अब वहां से आने के लिए उठा रहे हैं । 

  आसपास के क्षेत्रों के गोदामों एवं कंपनियों के मालिकों द्वारा कुछ मजदूरों को बसों से बुलाया जा रहा है, लेकिन जिन मजदूरों को बसें नहीं मिल रही हैं ,वह मजदूर ट्रक,टेंपो में जानवरों की तरह बैठकर वापस आ रहे हैं। इस प्रकार  से सैकड़ों की संख्या में मजदूर रोजाना आ रहे हैं। लेकिन बसों से आने वाले मजदूरों को भी उनके गंतव्य स्थान तक नहीं छोड़ा जा रहा है। पुलिस एवं आरटीओ के भय के कारण बसों से आने वाले मजदूरों को भिवंडी बाईपास,मानकोली नाका अथवा पड़घा टोल नाका के पास ही छोड़ दिया जा रहा है। बस से आने वाले मजदूरों से  3 से 4 हजार रुपया किराया लेने के बावजूद उन्हें भिवंडी बाईपास पर छोड़ दिया जा रहा है । बताया जाता है कि अधिकांश बसे एवं ट्रक,टेंपो आदि रात के अंधेरे में ही यहां आ रहे हैं। झारखंड से आने वाले मजदूर प्रेमकुमार ने बताया कि वह डोंबिवली के पलावा में कारपेंटर का काम करते हैं, उनके मालिक ने उन्हें बस से बुलाया है,6 महीने बाद वापस आ रहे हैं। उन्हें बस वाले ने भिवंडी बाईपास के पास छोड़ दिया था । 

   कांदीवली एवं बोरीवली सहित अन्य  क्षेत्रों  में जाने वाले मजदूर यहां से पैदल ही जा रहे हैं । बलरामपुर से आने वाले मजदूर ने बताया कि उसे भिवंडी बाईपास पर छोड़ दिया गया था, कांदीवली जाने के लिए कोई साधन न मिलने के कारण वह पैदल ही जा रहा है। इसी  प्रकार  झारखंड के रहने वाले इकबाल अंसारी ने बताया कि उन्हें भी भिवंडी में छोड़ दिया गया था,कांदीवली में भंगार का धंधा करने वाले नारायण ने बताया कि वह  7 महीने बाद वापस आ रहे हैं, उन्हें भी भिवंडी बाईपास पर छोड़ दिया गया था इसलिए यहां से पैदल ही जा रहे हैं ।अपने गृह प्रदेश से आने वाले मजदूरों को आज भी उक्त प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है जो चिंता का विषय बना हुआ है।             

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