डोंबिवली : उंबार्ली टेकड़ी पर पहुँचे निसर्ग प्रेमी,गर्मी की मार झेल रहे पशु पक्षियों के लिए बनाया जलाशय

by | Mar 17, 2021 | ठाणे, महाराष्ट्र

मिथिलेश गुप्ता
डोंबिवली : केवल मनुष्य ही नहीं बल्कि पशु-पक्षी भी तेज गर्मी की मार झेल रहे हैं। संवेदनशील पशु-पक्षी मित्र पशु पक्षियों के लिए घर के बाहर दाना पानी रखते हैं, लेकिन जंगल में कई जानवरों और पक्षियों के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं देखा जाता है। डोंबिवली के पास उंबार्ली टेकड़ी पर बड़ी संख्या में पशु पक्षी रहते है और उन्हें गर्मी के दिनों में पानी उपलब्ध कराने के लिए क्षेत्र में निसर्ग संरक्षण के लिए काम करने वाले स्वयंसेवी संगठनों द्वारा पानी का कृत्रिम हौद बनाया गया है । डोंबिवली के लोगों ने इस पहल में भाग लिया और कड़ी मेहनत के माध्यम से इन जलाशयों का निर्माण किया। कुछ प्राकृतिक जलाशयों से मलबे निकालकर साफ किया है ।निसर्ग प्रेमी मंगेश कोयंडे ने कहा कि श्रम के माध्यम से क्षेत्र में कुछ और जलाशयों का निर्माण किया जाएगा और यह ध्यान रखा जाएगा कि पशु और पक्षियों को पानी के लिए ज्यादा संघर्ष न करना पड़े।

डोंबिवली के पास उंबार्ली टेकडी पर डोंबिवली पक्षी अभयारण्य प्रकृति संरक्षण कार्य पिछले कुछ महीनों से विभिन्न NGO, कल्याण डोंबिवलीकर नागरिकों के माध्यम से चल रहा है। इस बीच, निसर्ग प्रेमियों ने देखा कि इस पहाड़ी पर कुछ प्राकृतिक जलाशय हैं, ठाणे जिले में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है जहां लोग गर्मी से परेशान है, वहीं जानवरों को भी परेशानी हो रही है। शहरी क्षेत्रों में कुछ जागरूक नागरिक, पशु-पक्षी मित्र अपने आसपास के क्षेत्रों में पानी रखकर मदद करते हैं। लेकिन वन क्षेत्र में जलाशय सूखने के बाद, जानवरों और पक्षियों को पानी के लिए यहां वहां भटकना पड़ता है।गर्मियों में डोंबिवली पक्षी अभयारण्य में पक्षियों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े इसके लिए, एनजीओ ने कड़ी मेहनत के माध्यम से कृत्रिम जलाशय बनाने की पहल की। छुट्टी के दिन पहाड़ी पर ऊपरी तटबंध के पास सड़क के किनारे जंगल के पत्थरों, मिट्टी, पत्तियों और घास फूस की मदद से छोटे छोटे हौद बनाकर पानी भरे गए ।पारदर्शी प्लास्टिक का इस्तेमाल पानी को स्टोर करने के लिए किया गया है । यह लगभग 10 बाय 4 फीट लंबा और 1 से 2 फीट गहरा है। प्रथम प्रयास में, कुछ जलाशय का निर्माण किया गया है और आने वाले समय में और जलाशय व हौद निर्माण किया जाएगा ऐसा मंगेश ने बताया। पानी के लिए जलाशय तैयार करने के अलावा, कुछ स्वयंसेवकों ने क्षेत्र से शराब की बोतलें और प्लास्टिक कचरा एकत्र किया। गौरी कुंड से मलबा निकाला जिससे इसका जल स्तर बढ़ेगा । इस पहल में लगभग 50 स्वयंसेवकों ने भाग लिया। उन्होंने यह भी कहा कि वन विभाग के सहयोग से हर रविवार को जंगल में इसी तरह की गतिविधियां की जाएंगी।

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