अष्टोमेट मरीजो को विकलांगता की श्रेणी में अधिकार के इंतजार में 45 साल पीछे – उदय केरवार

by | Feb 18, 2021 | महाराष्ट्र, मुंबई

● धर्मेंद्र उपाध्याय
मुंबई : ओष्टामी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन उदय केरवार और सचिव शेखर भाई ठाकुर ने थावरचंद गहलोत केंद्रीय सामाजिक कल्याण मंत्री से मांग की है कि ओष्टमी मरीजों को हैंडीकैप का दर्जा दिया जाए साथ ही साथ कमलापुरी वैश्य समाज ट्रस्ट के सचिव राजेंद्र गुप्ता ने बताया ओस्ष्टमी ऐसी बीमारी है जब आदमी के मल मूत्र का निकास का प्राकृतिक मार्ग अवरुद्ध हो जाता है तब ऐसे लोगों का ऑपरेशन करके मल मूत्र निकास के लिए कृतिम मार्ग तैयार किया जाता है और रोगी के पेट के पास एक थैली चिपका दी जाती है। जिसमें हमेशा मल मूत्र का आवागमन होता है।इस थैली को आजीवन भर बदलना पड़ता है जो काफी खर्चीला होता है।साथ ही ऐसे लोगों को हमेशा बड़े डॉक्टर के संपर्क में रहना पड़ता है। इस रोग के शिकार लोग काम करने में असमर्थ होते हैं क्योंकि मल मूत्र की थैली हमेशा साथ रहने के कारण वह बाहर निकलने से कतराते करते हैं। इस थैली में हमेशा लीकेज का डर बना रहता है रात भर पूरी तरह सो नहीं पाते डिप्रेशन का शिकार भी हो जाते हैं।यदि सरकार ऐसे लोगों को विकलांग का दर्जा दे और जीएसटी इन उपकरणों पर ना लगाएं तो इन्हें काफी राहत मिल सकती हैं। इस कदम से ओष्टमी से पीड़ित व्यक्तियों में आशा का संचार हो सकता है और इनमें भी जीवन के प्रति आकर्षण पैदा हो सकता है। इस संदर्भ में शेखर भाई ठाकुर महामहिम से भी गुहार लगाएंगे की मरीजों को जल्द से जल्द विकलांगता की श्रेणी में लाया जाए साथ ही साथ गवर्नमेंट के गैजेट में पेज नंबर 80 पर पार्ट 2 सेक्शन 3 पर लगातार लीकेज होने की समस्याओं को विकलांगता की श्रेणी में 75 प्रतिशत से ज्यादा में गिना जाता है। अतः सरकार से अनुरोध है कि जल्द से जल्द इन मरीजों के बारे में गंभीरता से विचार करें और उन्हें न्याय दे| साथ ही अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एसोसिएशन की कला अकैडमी नेशनल प्रेसिडेंट रशिम शाह ने उपर्युक्त मांग का समर्थन करते हुए केंद्र से जल्द सकारात्मक कदम उठाने के मांग की है ।

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