बोईसर: बंजर हो रही किसानों की जमीनें, खत्म हो रहे पारंपरिक व्यवसाय, जल जंगल जमीन पर कहर बरपा रहे केमिकल माफिया

by | Sep 3, 2020 | पालघर, महाराष्ट्र

चोरी छिपे खेतो में केमिकल डाल कर भाग रहे केमिकल माफिया

औद्योगिक क्षेत्र में बड़ी संख्या में केमिकल माफिया सक्रिय है। जिनका नेताओ और अधिकारियों से गठजोड़ है। और प्रदूषण नियंत्रण मंडल की खुली छूट मिली होने के कारण यह माफिया अब खाड़ियों, नदियों, नालों के बाद किसानों के खेतों को अपना निशाना बना रहे है।

योगेंद्रसिंह ठाकुर 
बोईसर-तारापुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित फैक्ट्रियाें से छोड़े जाने वाले घातक रसायनिक पानी ने खाड़ियों और प्राकृतिक नदियों, नालों को पूरी तरह प्रदूषित कर दिया है। जिससे मछलियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में जलीय जीव मर रहे है। मछुवारों का कहना है कि पिछले काफी समय से हम खाड़ियों में छोड़े जा रहे जहरीले पानी पर रोक लगाने के लिए आंदोलन व संघर्ष कर रहे है लेकिन प्रदूषण को नियंत्रित करने वाले अधिकारी गले तक भष्ट्राचार में डूब गए है। जिससे वह छोटी छोटी कंपनियों पर कार्यवाही कर कागजी खानापूर्ति कर लेते हैं। और इसका दुष्परिणाम किसान व मछुवारे भुगत रहे हैं।जिससे उनका मछलियों को पकड़ने का वर्षों पूरा पारंपरिक व्यवसाय समाप्त होने की कगार पर है। 


फैक्टियों की मनमानी
फैक्ट्रियों से निकलने वाले जहरीले पानी को फैक्ट्रियों के अंदर शोधन के बाद नाले में बहाने का नियम है। फैक्ट्रियां इसका दावा भी करती है लेकिन लोगों का कहना है कि ऐसा हो नहीं रहा है। बिना शोधन के ही पानी इसमें डाला जा रहा है।

केमिकल माफिया चोरी छिपे किसानों के खेतों में केमिकल डालकर हो रहे फरार

औद्योगिक क्षेत्र में बड़ी संख्या में केमिकल माफिया सक्रिय है। जिनका नेताओ और अधिकारियों से गठजोड़ है। और प्रदूषण नियंत्रण मंडल की खुली छूट मिली होने के कारण यह माफिया अब खाड़ियों, नदियों, नालों के बाद किसानों के खेतों को अपना निशाना बना रहे है। और उनके खेतो में रात को गुपचुप केमिकल डालकर फरार हो जा रहे है। जिससे उपजाऊ भूमि बंजर हो रही है। किसानों का कहना है, कि भूमि बंजर हाे जाने से खेतों में पैदावार नहीं हो रही है। जिससे खेतों में काम कर गुजर बसर करने वाले हजारो परिवारों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।


फैक्टी मालिको अधिकारियों नेताओ की मिलीभगत  मानव जीवन के लिए खतरा


बढ़ते प्रदूषण के विरुद्ध लंबे समय से संघर्ष कर रहे पर्यवारण दक्षता मंच के संस्थापक मनीष संखे ने आरोप लगाया कि प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण क्षेत्र से किसानों व मछुवारों के पारंपरिक व्यवसाय ध्वस्त हो गए है। पर्यवारण को बचाने लिए अगर जल्द ही युद्ध स्तर पर प्रयास नही किये गए तो प्रदूषण मानव जीवन के लिए क्षेत्र में गंभीर खतरा बनेगा।संखे ने कहा कि केमिकल माफियाओं को फैक्टरियों से उनका घातक केमिकल ठिकाने लगाने की एवज में करोड़ो रूपये मिलते है। जिनमे अधिकारियों और नेताओं का भी हिस्सा होता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण से जल,जंगल जमीन पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। फैक्टी मालिको, अधिकारियों और नेताओ की मिलीभगत क्षेत्र में मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बन गया है।

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